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Vikramshila Setu Repair: 3 महीने में मरम्मत का लक्ष्य, IIT पटना की मदद से तेज होगा काम

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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु हादसे के बाद सरकार ने 3 महीने में मरम्मत का लक्ष्य तय किया है। IIT पटना और अन्य एजेंसियों की मदद से काम तेज किया जाएगा।

भागलपुर/आलम की खबर:भागलपुर में गंगा नदी पर बना ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु हालिया क्षति के बाद अब बड़े पैमाने पर मरम्मत प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार ने इस सेतु को जल्द से जल्द चालू करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए तीन महीने के भीतर मरम्मत कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस घटना के बाद प्रशासनिक सक्रियता और तकनीकी स्तर पर तेज फैसलों ने यह संकेत दे दिया है कि सरकार इस बार किसी भी तरह की देरी के मूड में नहीं है।

घटना के बाद सोमवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पुल के जिस हिस्से में क्षति हुई है, वह तकनीकी रूप से जटिल स्पैन है, जिसकी मरम्मत के लिए विशेष इंजीनियरिंग उपाय अपनाने होंगे। यही कारण है कि इस काम को मिशन मोड में लिया गया है और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जा रही है।

सरकार ने इस परियोजना में आईआईटी पटना सहित अन्य तकनीकी एजेंसियों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इन संस्थानों की विशेषज्ञ टीम पुल की संरचना, क्षतिग्रस्त हिस्से और भविष्य में संभावित जोखिमों का विस्तृत अध्ययन करेगी, ताकि मरम्मत कार्य टिकाऊ और सुरक्षित तरीके से किया जा सके। अधिकारियों का मानना है कि केवल अस्थायी समाधान से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस बार स्थायी और मजबूत पुनर्निर्माण पर जोर दिया जाएगा।

वहीं, घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने वैकल्पिक यातायात व्यवस्था भी लागू कर दी है। दक्षिण और उत्तर बिहार के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए यात्रियों और वाहनों को श्रीकृष्ण सिंह सेतु (मुंगेर) और खगड़िया के गंगा पुल के रास्ते जाने की सलाह दी गई है। इन मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था भी की गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल भागलपुर और नवगछिया के बीच पीपा पुल बनाने का विकल्प नहीं अपनाया जाएगा। इसके पीछे मुख्य वजह आगामी मानसून को बताया जा रहा है, क्योंकि बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से अस्थायी पुल सुरक्षित नहीं रह पाते। इसके बजाय वैकल्पिक रूप से स्टीमर सेवा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि स्थानीय लोगों को आवागमन में राहत मिल सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही के संकेत मिलने के बाद संबंधित कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से पुल की स्थिति को लेकर चेतावनी मिल रही थी, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित किया है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बातचीत कर सीमा सड़क संगठन (BRO) की तकनीकी सहायता मांगी है। केंद्र की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह साफ है कि मरम्मत कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता दी जा रही है।

घटना की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो रविवार देर रात लगभग 12:30 बजे पुल के एक हिस्से में अचानक धंसाव शुरू हुआ। स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने तुरंत यातायात रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। कुछ ही देर बाद पुल का वह हिस्सा पूरी तरह टूटकर नीचे गिर गया। यदि समय रहते ट्रैफिक नहीं रोका जाता, तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुल पर वर्षों से बढ़ते ट्रैफिक दबाव और समय-समय पर पर्याप्त रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी संरचना कमजोर हो गई थी। हालांकि पिछले वर्षों में मरम्मत कार्य हुए थे, लेकिन वे दीर्घकालिक समाधान साबित नहीं हो सके। यही वजह है कि इस बार मरम्मत के साथ-साथ पूरे पुल की संरचनात्मक समीक्षा भी की जा रही है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि इस साल दिसंबर तक विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे नए पुल को चालू कर दिया जाएगा। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती है, तो क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा और भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सकेगा।

फिलहाल, विक्रमशिला सेतु की मरम्मत को लेकर प्रशासन, तकनीकी एजेंसियों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय तेज हो गया है। तीन महीने की तय समयसीमा एक चुनौती जरूर है, लेकिन जिस गति से काम की योजना बनाई जा रही है, उससे उम्मीद जताई जा रही है कि यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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